अल फलाह यूनिवर्सिटी पर धोखाधड़ी की FIR: बिना मान्यता मेडिकल कॉलेज चलाने का आरोप, क्राइम ब्रांच ने 7 घंटे की छापेमारी

National News: अल फलाह यूनिवर्सिटी पर बिना नैक-एनएमसी मान्यता मेडिकल कॉलेज चलाने की धोखाधड़ी FIR। आतंकी कनेक्शन (डॉ. शाहीन, मुजम्मिल) के बाद क्राइम ब्रांच ने जामिया नगर ऑफिस पर 7 घंटे छापा मारा, दस्तावेज जब्त। झूठे दावे, छात्रों का भविष्य खतरे में। यूजीसी-नैक अनियमितताएं, फंडिंग-फैकल्टी जांच।

Samvadika Desk
3 Min Read
अल फलाह यूनिवर्सिटी
Highlights
  • अल फलाह यूनिवर्सिटी पर बिना मान्यता मेडिकल कॉलेज चलाने की FIR
  • नैक एक्रीडिटेशन वर्षों पहले समाप्त, नवीनीकरण नहीं!
  • जामिया नगर ट्रस्ट ऑफिस पर 7 घंटे छापेमारी, पूछताछ!

दिल्ली: दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर के आतंकी हमले में नामजद तीन डॉक्टरों—डॉ. शाहीन, डॉ. उमर और डॉ. मुजम्मिल—के अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े होने के बाद संस्थान कानूनी शिकंजे में फंस गया है। अब नया खुलासा यह है कि यूनिवर्सिटी लंबे समय से बिना वैध मान्यता के मेडिकल कॉलेज चला रही थी। यूजीसी और नैक की शिकायत पर दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने धोखाधड़ी और जालसाजी की दो अलग-अलग FIR दर्ज की हैं। शनिवार को क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल ने जामिया नगर स्थित अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के दफ्तर पर छापा मारा और सात घंटे तक पूछताछ व दस्तावेज जांच की।

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बिना नवीनीकरण मान्यता, झूठे दावे

जागरण की रिपोर्ट के हवाले से क्राइम ब्रांच सूत्रों के अनुसार, अल फलाह यूनिवर्सिटी का नैक एक्रीडिटेशन वर्षों पहले समाप्त हो चुका था, लेकिन नवीनीकरण नहीं कराया गया। यूनिवर्सिटी दावा करती रही कि उसके पास वैध मान्यता है। यूजीसी और नैक की समीक्षा में “बड़ी अनियमितताएं” पाई गईं। मेडिकल कॉलेज भी बिना एनएमसी (नेशनल मेडिकल काउंसिल) की मान्यता के चल रहा था। जांच में पाया गया कि संस्थान ने छात्रों और अभिभावकों को गुमराह करने के लिए झूठे दावे किए।

7 घंटे की छापेमारी, दस्तावेज जब्त

शनिवार सुबह करीब 11 बजे क्राइम ब्रांच की टीम जामिया नगर ट्रस्ट ऑफिस पहुंची। सात घंटे तक चली कार्रवाई में कर्मचारियों, पदाधिकारियों से पूछताछ की गई। यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। टीम ने मान्यता, फैकल्टी रिकॉर्ड, छात्र नामांकन और फाइनेंशियल डिटेल्स की गहन पड़ताल की। जांच का जिम्मा इंटर स्टेट सेल को सौंपा गया है।

लोगों ने उठाए सवाल: नियामक संस्थाओं की नाकामी?

ट्रस्ट दफ्तर के बाहर जुटे लोगों ने यूजीसी, नैक और एनएमसी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इन संस्थाओं की नाक के नीचे बिना मान्यता मेडिकल कॉलेज चलता रहा, उन्हें पता तक नहीं चला। अभिभावकों और स्थानीय लोगों में गुस्सा है कि छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया।

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यूनिवर्सिटी का इतिहास

  • 1997: अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट ने धौज में इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू किया।
  • 2010: नैक से ‘ए’ ग्रेड मिला।
  • 2014: हरियाणा विधानसभा से यूनिवर्सिटी का दर्जा।
  • 2019: मेडिकल कॉलेज की शुरुआत।
  • वर्तमान: 200 फैकल्टी, करीब 1500 छात्र।

आतंकी कनेक्शन से शुरू हुई जांच

10 नवंबर के दिल्ली ब्लास्ट में पकड़े गए डॉ. मुजम्मिल (अल फलाह में असिस्टेंट प्रोफेसर), डॉ. शाहीन और डॉ. उमर यहीं फैकल्टी थे। फरीदाबाद में 2,900 किलो विस्फोटक बरामदगी के बाद यूनिवर्सिटी पर शक गहराया। अब धोखाधड़ी की FIR ने संस्थान की मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं। पुलिस यूनिवर्सिटी के पूरे रिकॉर्ड, फंडिंग और फैकल्टी बैकग्राउंड की जांच कर रही है।

यूनिवर्सिटी को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। छात्रों और अभिभावकों में चिंता का माहौल है। यह मामला न सिर्फ शिक्षा में धोखाधड़ी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ गया है। जांच आगे बढ़ रही है।

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