दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शादीशुदा होकर भी किसी और के साथ लिव-इन में रहने से नहीं छिनेंगे मौलिक अधिकार, कपल को मिली पुलिस सुरक्षा

Delhi High Court on Live-in Relationship: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि शादीशुदा होने के बावजूद दो बालिग व्यक्ति अपनी मर्जी से लिव-इन रिलेशनशिप में रह सकते हैं। उनके मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21 और 19) इससे प्रभावित नहीं होते। कोर्ट ने महिला और उसके साथी को पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश दिया। महिला ने पति के उत्पीड़न से तंग आकर नया रिश्ता चुना था। फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता को मजबूती देता है।

Samvadika Desk
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Delhi High Court
Highlights
  • शादीशुदा होकर भी लिव-इन में रहने का अधिकार बरकरार – हाईकोर्ट!
  • मौलिक अधिकारों पर कोई असर नहीं, दोनों को मिली पुलिस सुरक्षा!
  • महिला ने पति के उत्पीड़न के बाद चुना नया जीवनसाथी!

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक महत्वपूर्ण और प्रगतिशील फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगर दो बालिग व्यक्ति अपनी मर्जी से लिव-इन में रह रहे हैं, तो शादीशुदा होना उनके मौलिक अधिकारों को कम नहीं करता। ऐसे में उन्हें अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 19 के तहत पूरी सुरक्षा मिलनी चाहिए।

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क्या था पूरा मामला?

पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला एक महिला और एक पुरुष के बीच लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़ा है। महिला साल 2016 से अपने पति द्वारा मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न झेल रही थी। ऐसे में उसने आगे बढ़ने का फैसला लिया और फरवरी 2026 से एक अन्य व्यक्ति के साथ हैदराबाद में लिव-इन रिलेशनशिप शुरू कर दी।

साथ रहने के फैसले के बाद महिला के परिवार और पति की तरफ से लगातार धमकियां मिलने लगीं। स्थानीय पुलिस के हस्तक्षेप से भी उनकी परेशानी बढ़ गई। इन हालातों से बचने के लिए दोनों दिल्ली आ गए और अपनी सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।

कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस सौरभ बनर्जी की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद साफ कहा कि दोनों याचिकाकर्ता बालिग हैं। इसलिए उन्हें अपनी जिंदगी अपनी मर्जी से जीने और अपने फैसले लेने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का शादीशुदा होना, अविवाहित होना या लिव-इन रिलेशनशिप में रहना उसके मौलिक अधिकारों को कम नहीं करता। ये सभी व्यक्तिगत फैसले हैं और कानून इनके आधार पर किसी के अधिकारों को नहीं छीन सकता।

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अदालत ने कपल को राहत देते हुए पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें किसी भी तरह की धमकी या उत्पीड़न से बचाया जाए।

फैसले का महत्व

यह फैसला उन सभी मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जहां शादीशुदा व्यक्ति किसी अन्य बालिग के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा है। हाईकोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि बालिग लोगों की पसंद और स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए। शादी का बंधन मौजूद होने के बावजूद, अगर दोनों पक्ष सहमति से साथ रहना चाहते हैं, तो कानून उन्हें सुरक्षा प्रदान करेगा।

कोर्ट ने इस मामले में महिला के पति और परिवार द्वारा दी जा रही धमकियों को गंभीरता से लिया और पुलिस को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिए।

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यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता, वयस्कों के अधिकारों और लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब इस मामले पर सबकी नजरें आगे की सुनवाई और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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