शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली क्षेत्र में अवैध घोषित मस्जिद को लेकर विवाद फिर से भड़क गया है। देवभूमि संघर्ष समिति सहित हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को प्रशासन को सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा कि जब तक मस्जिद को पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन और आमरण अनशन जारी रहेगा। संजौली थाने के बाहर पिछले चार दिनों से धरना-प्रदर्शन चल रहा है। समिति के दो पदाधिकारियों ने अनशन शुरू कर दिया है। गुरुवार देर रात प्रशासन और संगठनों के बीच वार्ता में मौखिक सहमति बनी, लेकिन हिंदू नेता लिखित आदेश पर ही आंदोलन समाप्त करने पर अड़े हैं। 29 नवंबर को संयुक्त समिति की बैठक होगी, जहां फैसला लिया जाएगा।
विवाद की जड़: अवैध निर्माण और जुमे की नमाज पर रोक
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संजौली मस्जिद विवाद पुराना है। मई 2025 में शिमला नगर निगम आयुक्त की अदालत ने मस्जिद को पूरी तरह अवैध घोषित कर ढहाने का आदेश दिया था। जिला अदालत ने भी अपील खारिज कर दी। बावजूद इसके, नगर निगम ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। 14 नवंबर को जुमे की नमाज के दौरान देवभूमि संघर्ष समिति की महिलाओं ने मस्जिद में बाहरी लोगों को प्रवेश देने का विरोध किया। उनका तर्क था कि अवैध ढांचे में नमाज नहीं होनी चाहिए। इससे तनाव बढ़ गया और पुलिस ने समिति के छह सदस्यों (चार महिलाएं सहित) पर FIR दर्ज की।
समिति का कहना है कि मस्जिद में बढ़ती बाहरी भीड़ स्थानीय महिलाओं की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है। स्थानीय निवासियों ने डिप्टी कमिश्नर अनुपम कश्यप को ज्ञापन सौंपा था, जिसमें पहचान सत्यापन, नमाज पर रोक और ढांचा सील करने की मांग की गई। लेकिन प्रशासन की चुप्पी से नाराजगी बढ़ी।
हिंदू संगठनों की मुख्य मांगें
हिंदू संगठनों ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
- मस्जिद का बिजली-पानी कनेक्शन काटना और सीलिंग: कोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई न होने पर सवाल।
- FIR रद्दीकरण: 14 नवंबर को नमाज रोकने वाले छह सदस्यों पर दर्ज FIR वापस हो।
- अवैध निर्माण ध्वस्त: पूरी मस्जिद गिराने तक आंदोलन जारी।
देवभूमि संघर्ष समिति के सह-संयोजक विजय शर्मा ने कहा, “सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन को भी दबा रही है। अवैध ढांचे पर नमाज और गतिविधियां नहीं चलनी चाहिए। लिखित आश्वासन मिले बिना अनशन नहीं टूटेगा।”
प्रशासन की वार्ता: मौखिक सहमति, लेकिन लिखित आदेश पर अड़े संगठन
गुरुवार रात प्रशासनिक अधिकारियों और हिंदू नेताओं की बैठक में मौखिक सहमति बनी। डिप्टी कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि 29 नवंबर को संयुक्त समिति बनेगी, जो मस्जिद मुद्दे पर फैसला लेगी। लेकिन संगठन लिखित आदेश पर ही आंदोलन समाप्त करने पर जोर दे रहे हैं। संजौली थाने के बाहर धरना जारी है, जहां कार्यकर्ता नारे लगा रहे हैं—”अवैध मस्जिद तोड़ो, हिंदू एकता जिंदाबाद।”
विवाद का इतिहास: 2024 से चली आ रही तनातनी
संजौली मस्जिद विवाद 31 अगस्त 2024 को मैहली में दो गुटों के झगड़े से शुरू हुआ। मस्जिद में छिपे कुछ लोग थे, जिससे हंगामा फैला। सितंबर 2024 में उग्र प्रदर्शन हुआ, पुलिस को लाठीचार्ज और पानी की बौछार करनी पड़ी। मई 2025 में नगर निगम ने चार मंजिलों को अवैध घोषित किया, फिर पूरे ढांचे पर बुलडोजर चले। वक्फ बोर्ड ने अपील की, लेकिन जिला अदालत ने 30 अक्टूबर 2025 को खारिज कर दी। फिर भी कार्रवाई न होने से आंदोलन तेज हो गया।
स्थानीय लोगों की चिंता: सुरक्षा और अवैध निर्माण
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि शुक्रवार को बाहरी लोग बड़ी संख्या में आते हैं, जिससे सुरक्षा खतरा बढ़ जाता है। वे पहचान सत्यापन की मांग कर रही हैं। हिंदू संगठन इसे ‘धार्मिक अतिक्रमण’ बता रहे हैं। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि मस्जिद ऐतिहासिक है और कार्रवाई से धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी।
राजनीतिक रंग: BJP-HP सरकार पर दबाव
विपक्ष ने सरकार पर नरमी का आरोप लगाया है। BJP विधायक ने कहा कि अवैध निर्माण पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। हिमाचल सरकार ने शांति बनाए रखने की अपील की है। 29 नवंबर की बैठक पर सभी निगाहें टिकी हैं।
यह विवाद शिमला की सांप्रदायिक सद्भावना को चुनौती दे रहा है। प्रशासन ने अतिरिक्त फोर्स तैनात की है और वार्ता जारी रखने का आश्वासन दिया है।

