कांकेर: लालच में फंसकर ईसाई बने 200 से ज्यादा आदिवासियों ने सनातन धर्म में की वापसी, मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ हुआ सामूहिक ‘घर वापसी’ समारोह

Ghar Wapasi in Kanker, Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में लालच (बीमारी इलाज, आर्थिक मदद) में फंसकर ईसाई बने 50 परिवारों के 200 से ज्यादा आदिवासियों ने सनातन धर्म में वापसी की। पीढ़ापाल गांव में मंदिर में पूजा-अर्चना, गंगाजल छिड़काव के साथ सामूहिक 'घर वापसी' समारोह हुआ। आदिवासी समाज में खुशी का माहौल, और कुछ परिवार जल्द लौटने वाले हैं।

Samvadika Desk
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कई लोगों ने एक साथ पूजा कर की घर वापसी (इमेज - इंडिया-टाइम्स)
Highlights
  • 200+ आदिवासी ईसाई धर्म छोड़ सनातन में लौट आए!
  • लालच और बहकावे में फंसे थे, अब घर वापसी!
  • मंदिर में गंगाजल छिड़काव, पूजा-अर्चना के साथ स्वागत!

कांकेर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक बड़ा और भावुक घटनाक्रम देखने को मिला है। रविवार को पीढ़ापाल, धनतुलसी, मोदे, साल्हेभाट, किरगापाटी और तरांदुल समेत कई गांवों के 50 से ज्यादा परिवारों के लगभग 200 लोग ईसाई धर्म छोड़कर सनातन धर्म में वापस लौट आए। इन लोगों ने लालच और बहकावे में आकर धर्म परिवर्तन किया था, लेकिन अब सामूहिक रूप से अपने मूल धर्म की ओर लौटने का फैसला किया है।

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पीढ़ापाल गांव में आयोजित ‘घर वापसी’ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग, गायता, पटेल और अन्य सम्मानीय व्यक्ति मौजूद थे। मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद गंगाजल छिड़काव कर इन 200 लोगों को सनातन धर्म में वापस शामिल किया गया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया गया और सभी ने एक साथ मंत्रोच्चार किए। इस घटना ने पूरे इलाके में खुशी और उत्साह का माहौल पैदा कर दिया है।

लालच और बहकावे में फंसे थे लोग

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घर वापसी करने वाले लोगों ने बताया कि उन्हें बीमारी ठीक करने, आर्थिक मदद, इलाज और अन्य तरह के लालच देकर ईसाई धर्म में परिवर्तित कराया गया था। कई सालों तक ईसाई धर्म में रहने के बाद उन्होंने सोचा कि यह उनका मूल धर्म नहीं है। आपसी चर्चा और सामाजिक संवाद के बाद उन्होंने सनातन धर्म में लौटने का फैसला किया। एक प्रतिभागी ने कहा, “हमने महसूस किया कि हमारा असली धर्म यही है। लालच में फंसकर हम दूर चले गए थे, लेकिन अब वापस घर लौट आए हैं।”

आदिवासी समाज में खुशी का माहौल

सर्व आदिवासी समाज के सदस्य ईश्वर कावड़े ने बताया कि पीढ़ापाल में 25 गांवों के समाज प्रमुखों, गायता और पटेलों की मौजूदगी में यह घर वापसी हुई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के 3-4 परिवार अभी भी धर्मांतरित हैं, जो जल्द ही मूल धर्म में लौटने वाले हैं। आदिवासी समाज में इस घटना को लेकर खुशी और गर्व का माहौल है। प्रशासन ने भी पूरे कार्यक्रम पर नजर रखी और शांतिपूर्ण तरीके से समारोह संपन्न हुआ।

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यह घटना छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और घर वापसी के मुद्दे पर नई बहस छेड़ रही है। कांकेर जिले में यह सामूहिक घर वापसी आदिवासी समुदाय की जागरूकता और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव को दर्शाती है। लोग इसे एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं।

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