जोधपुर, राजस्थान: राजस्थान में भजनलाल सरकार द्वारा धर्म परिवर्तन कानून में संशोधन के बीच जोधपुर से सनसनीखेज खुलासे सामने आए हैं। टाइम्स नाऊ नवभारत की जाँच में जबरन धर्म परिवर्तन और लव जिहाद के तीन मामलों का पर्दाफाश हुआ है, जिनमें विशेष समुदाय के युवकों ने हिंदू युवतियों को प्रेम के जाल में फँसाकर ब्लैकमेल किया और शादी के लिए मजबूर किया। यह मामला को चर्चा में है, और सरकार के नए कानून ने इसे और सुर्खियों में ला दिया है।
सुनियोजित साजिश का खुलासा
टाइम्स नाऊ नवभारत ने जोधपुर में तीन ऐसे मामलों को उजागर किया, जहाँ हिंदू युवतियों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया। एक पीड़िता ने बताया कि एक युवक ने पहले अपना नाम सुमित बताकर दोस्ती की, लेकिन बाद में उसका असली नाम साजिद निकला। उसने युवती के साथ संबंध बनाए और फिर निकाह के लिए दबाव डाला। पीड़िता ने खुलासा किया कि वह तीन बार गर्भवती हुई, लेकिन हर बार उसका गर्भपात करवाया गया। फिर भी, युवती ने हिम्मत दिखाई और साजिद को जेल भिजवाकर अपनी लड़ाई जीती। अन्य मामलों में भी कम उम्र की लड़कियों को निशाना बनाया गया, जो इस साजिश की गंभीरता को दर्शाता है।
कम उम्र की लड़कियाँ निशाने पर
जाँच में सामने आया कि ज्यादातर मामलों में 11 से 15 साल की किशोरियाँ, जो स्कूल जाती हैं, सॉफ्ट टारगेट बन रही हैं। ये लड़कियाँ अपनी कच्ची उम्र के कारण आसानी से प्रेम और लालच के जाल में फँस जाती हैं। टाइम्स नाऊ नवभारत से बात करते हुए पॉक्सो कोर्ट, जोधपुर की लोक अभियोजक वीणा चौहान ने बताया कि यह पूरी तरह से एक सेट टारगेट वाली साजिश है। उन्होंने कहा कि लव जिहाद के मामले अक्सर कम दर्ज होते हैं, क्योंकि पीड़िताएँ डर या सामाजिक दबाव के कारण सामने नहीं आतीं।
कानून विशेषज्ञों की राय
एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि इस तरह की साजिश में किशोरियों को विशेष रूप से निशाना बनाया जाता है, क्योंकि उनकी उम्र और समझ का फायदा उठाना आसान होता है। उन्होंने कहा कि अपराधी पहले दोस्ती का झाँसा देते हैं, फिर ब्लैकमेलिंग और डर का सहारा लेकर धर्म परिवर्तन और शादी के लिए मजबूर करते हैं। यह एक सुनियोजित रणनीति है, जिसके पीछे गहरी साजिश की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में कठोर कानूनी कार्रवाई जरूरी है।
भजनलाल सरकार का नया कानून
भजनलाल सरकार ने हाल ही में धर्म परिवर्तन कानून में संशोधन को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य जबरन धर्म परिवर्तन और लव जिहाद जैसे मामलों पर लगाम लगाना है। इस कानून के तहत कठोर सजा और जाँच की प्रक्रिया को और सख्त किया गया है। जोधपुर के इन खुलासों ने सरकार के इस कदम को और प्रासंगिक बना दिया है। लोग अब यह देख रहे हैं कि नए कानून के तहत इन मामलों में कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका
पुलिस ने इन मामलों की जाँच शुरू कर दी है और कुछ आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। जाँच में यह पता लगाया जा रहा है कि क्या ये घटनाएँ किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं। पुलिस को शक है कि इन साजिशों के पीछे संगठित गिरोह काम कर रहे हैं, जो प्रलोभन और ब्लैकमेलिंग के जरिए युवतियों को निशाना बनाते हैं। SP और अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और जल्द कार्रवाई का भरोसा दे रहे हैं।
सामाजिक और कानूनी सवाल
यह मामला धर्म परिवर्तन, लव जिहाद, और सामाजिक संवेदनशीलता जैसे जटिल मुद्दों को उजागर करता है। कम उम्र की लड़कियों को निशाना बनाना और ब्लैकमेलिंग के जरिए धर्म परिवर्तन कराना समाज में विश्वास और सुरक्षा पर सवाल उठाता है। यह घटना समाज से जागरूकता, परिवारों से बच्चों पर नजर, और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की माँग करती है। साथ ही, यह सवाल उठता है कि क्या नए कानून इस तरह की साजिशों को पूरी तरह रोक पाएँगे। यह प्रकरण न केवल कानूनी, बल्कि सामाजिक और धार्मिक स्तर पर भी गहरी बहस छेड़ रहा है।

