बरेली, उत्तर प्रदेश: बरेली के फरीदपुर थाना क्षेत्र में रविवार, 6 जुलाई 2025 को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। गौसगंज गाँव में मोहर्रम के जुलूस में निकाला जा रहा 23 फुट ऊँचा ताजिया हाईटेंशन लाइन से टकरा गया, जिससे उसमें आग लग गई। गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन हादसे ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। ताजिए की ऊँचाई तय मानक 12 फुट से कहीं ज्यादा थी, फिर भी हल्का दरोगा अशोक कुमार ने इसे मंजूरी दे दी थी। इस लापरवाही पर एसएसपी अनुराग आर्य ने दरोगा को तुरंत निलंबित कर जाँच शुरू कर दी।
हादसे ने मचाई अफरातफरी
गौसगंज गाँव से बरेली-शाहजहाँपुर रोड पर ताजिया जुलूस में सैकड़ों लोग मातम करते हुए चल रहे थे। तभी ताजिया बिजली की हाईटेंशन लाइन से टकरा गया। चिंगारियों के साथ ताजिए में आग भड़क उठी, और जुलूस में भगदड़ मच गई। लोग जान बचाकर भागे। कुछ युवकों ने हिम्मत दिखाते हुए ताजिए पर चढ़कर आग बुझाने की कोशिश की, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आग पर काबू पाने के बाद जले हिस्से को हटाकर ताजिए को कर्बला ले जाया गया और दफना दिया गया।
दरोगा की लापरवाही पड़ी भारी
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, जाँच में पता चला कि ताजिए की ऊँचाई 23 फुट थी, जबकि नियम के मुताबिक 12 फुट से ज्यादा की अनुमति नहीं है। दरोगा अशोक कुमार ने अपनी रिपोर्ट में ताजिए को मानक के अनुरूप बताया था, जिसके आधार पर जुलूस को मंजूरी मिली। इस गलती को गंभीर मानते हुए एसएसपी अनुराग आर्य ने दरोगा को सस्पेंड कर दिया और उनकी भूमिका की जाँच के आदेश दिए। एसपी दक्षिणी ने भी इस मामले में सख्ती दिखाई।
नियमों की अनदेखी का सबक
यह हादसा धार्मिक आयोजनों में नियमों की अनदेखी का गंभीर परिणाम दर्शाता है। अगर समय रहते आग पर काबू न पाया जाता, तो बड़ा नुकसान हो सकता था। यह घटना पुलिस और प्रशासन को सतर्क रहने और धार्मिक जुलूसों में सुरक्षा मानकों पर सख्ती बरतने की याद दिलाती है।

