झांसी: बीड़ा मुआवजे के 46 लाख रुपये ने खोल दी पांच साल पुरानी गांठें, प्रेमी संग भागी पत्नी लौटी और बोली – ‘हिस्सा तो मेरा भी है’

Jhansi News: झांसी के रक्सा में सुरेंद्र अहिरवार को बीड़ा मुआवजे के 46 लाख मिले तो 5 साल पहले प्रेमी संग भागी पत्नी पुष्पा अचानक लौट आई। 15-20 लाख हिस्सा मांगा, बेटे के नाम पर 8 लाख तुरंत देने की जिद। पंचायत-पुलिस सब बेकार, अब कोर्ट तय करेगा कि पुष्पा को कितना हक बनता है।

Samvadika Desk
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Highlights
  • 46 लाख का मुआवजा आया, 5 साल गायब पत्नी लौट आई!
  • प्रेमी संग भागी थी, अब हिस्सा मांगने पहुंची पुष्पा!
  • बेटे को पिता से मिलने नहीं दिया, अब उसका हिस्सा मांग रही!
  • पंचायत-पुलिस सब फेल, अब कोर्ट तय करेगा हिस्सा!

झांसी (रक्सा), उत्तर प्रदेश: बीड़ा (Bundelkhand Industrial Development Authority) की जमीन अधिग्रहण योजना ने इमलिया गांव के सुरेंद्र अहिरवार के खाते में 46 लाख रुपये का मुआवजा डाला, और ठीक उसी वक्त उनके जीवन में पांच साल से गायब पत्नी पुष्पा अचानक लौट आईं। पुष्पा ने दावा ठोंका कि मुआवजे में से कम से कम 15-20 लाख रुपये उन्हें और उनके बेटे को मिलना चाहिए। सुरेंद्र ने साफ इनकार कर दिया। दो दिन तक चली पंचायत और पुलिस की मध्यस्थता भी बेनतीजा रही। अब पूरा बुंदेलखंड इस अनोखे पारिवारिक ड्रामे की चर्चा कर रहा है।

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दस साल पहले हुई थी शादी, पांच साल पहले हो गई थीं गायब

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, सुरेंद्र अहिरवार की शादी मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले की रहने वाली पुष्पा से करीब दस साल पहले एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में हुई थी। शुरुआती दो-तीन साल तो ठीक चले, लेकिन उसके बाद पुष्पा का व्यवहार बदलने लगा। सुरेंद्र और उनके परिजनों के मुताबिक, आए दिन झगड़े होते, आत्महत्या की धमकियां मिलतीं और मायके वालों को झूठी शिकायतें की जाती थीं।

साल 2020 में पुष्पा अपनी बहन के देवर आकाश के साथ नजदीकियां बढ़ा लीं और एक दिन बेटे को लेकर घर से चली गईं। सुरेंद्र ने दो साल तक इंतजार किया, पंचायतें कराईं, लेकिन पुष्पा नहीं लौटीं। आखिरकार उन्होंने कोर्ट में तलाक का मुकदमा दायर कर दिया। बेटे को भी पुष्पा ने पिता से मिलने नहीं दिया।

46 लाख का मुआवजा आया, तो अचानक लौट आईं पुष्पा

बीड़ा परियोजना के तहत परिवार की जमीन गई और कुल 46 लाख रुपये मुआवजा तय हुआ। हाल ही में सुरेंद्र के खाते में पहली किस्त के 20 लाख रुपये आए। ठीक उसी शुक्रवार को पुष्पा अचानक घर पहुंच गईं। उन्होंने कहा, “मैं और मेरा बेटा भी इस मुआवजे में हिस्सेदार हैं। कम से कम 15-20 लाख रुपये तो हमें मिलना ही चाहिए। बेटे के हिस्से के आठ लाख रुपये तुरंत दो।”

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सुरेंद्र और उनके परिजनों ने साफ मना कर दिया। उनका कहना था, “पांच साल से तुम आकाश के साथ रह रही हो। बेटे को भी हमसे मिलने नहीं दिया। अब सिर्फ पैसों के लिए लौटी हो। तुम्हारा कोई हक नहीं बनता।”

दो दिन चली पंचायत, पुलिस भी नहीं सुलझा सकी

रविवार को घर में जबरदस्त हंगामा हुआ। दोनों पक्ष रक्सा थाने पहुंच गए। थाने में रविवार और सोमवार को लगातार पंचायत चली। ग्राम प्रधान, समाज के लोग और पुलिस – सबने समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई हल नहीं निकला। पुष्पा ने धमकी दी कि अगर हिस्सा नहीं मिला तो वह एफआईआर दर्ज कराएंगी और कोर्ट जाएंगी। सुरेंद्र का पक्ष था कि वह पहले ही तलाक का मुकदमा लड़ रहे हैं और पत्नी ने पांच साल तक परिवार का साथ छोड़ा है, इसलिए उसका कोई अधिकार नहीं।

भाभी सुमन ने खोला पूरा राज

सुरेंद्र की भाभी सुमन ने बताया, “दस साल पहले शादी हुई थी। पांच साल पहले ही यह आकाश (बहन का देवर) के साथ रहने चली गई थी। बेटे को भी ले गई। इन पांच सालों में एक बार भी घर नहीं आई। अब बीड़ा के पैसे आए तो लौट आई। बच्चे के नाम पर हिस्सा मांग रही है, जबकि बच्चे को पिता से मिलने तक नहीं देती।”

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सुरेंद्र ने खुद कहा, “शादी के बाद से ही झगड़े शुरू हो गए थे। आत्महत्या की धमकी देती थी। फिर 2020 में आकाश के साथ चली गई। अब सिर्फ पैसों के लिए लौटी है।”

कानूनी पेंच और इलाके में चर्चा

कानून के जानकारों के मुताबिक, अगर पत्नी ने पति को छोड़ा है और दूसरे के साथ रह रही है तो मुआवजे में उसका हिस्सा मिलना मुश्किल है, लेकिन बेटे का हिस्सा (यानी एक-तिहाई) कानूनी रूप से बनता है। अब यह मामला कोर्ट में जाएगा, जहां तलाक के केस के साथ-साथ मुआवजे का बंटवारा भी तय होगा।

इमलिया गांव से लेकर पूरे रक्सा क्षेत्र में लोग बस एक ही बात कर रहे हैं – “पैसा आया नहीं कि पुराने रिश्ते भी लौट आए।” बीड़ा मुआवजे ने कई घरों में खुशियां बेशक लाई हों, लेकिन सुरेंद्र अहिरवार के घर में तो यह सबसे बड़ा विवाद बनकर उतर आया है।

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