लखनऊ, उत्तर प्रदेश: लखनऊ मेट्रो अब शहर के उत्तरी हिस्से और प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों को जोड़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) ने वसंत कुंज से आईआईएम रोड तक प्रस्तावित नए मेट्रो कॉरिडोर के लिए सर्वे कार्य आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया है। यह करीब 10 किलोमीटर लंबा रूट शहर के बढ़ते उत्तरी क्षेत्र को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ेगा और हजारों छात्रों, शिक्षकों तथा शोधार्थियों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आएगा।
सर्वे से तय होगी रूट की रूपरेखा और लागत
हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि सर्वे टीम फिलहाल एलाइनमेंट (मार्ग निर्धारण) पर काम कर रही है। इस सर्वे के जरिए यह तय किया जाएगा कि रूट की कुल लंबाई कितनी होगी और निर्माण पर अनुमानित लागत कितनी आएगी। सर्वे में यह भी देखा जा रहा है कि कॉरिडोर का कितना हिस्सा एलिवेटेड (ऊंची पटरियों पर) होगा और कितना भूमिगत (अंडरग्राउंड)। प्राथमिक अनुमानों के मुताबिक, रूट की लंबाई लगभग 10 किलोमीटर होगी और बजट को नियंत्रित रखने के लिए अधिकांश हिस्सा एलिवेटेड ही रखा जाएगा, ताकि निर्माण तेजी से पूरा हो सके।
आईआईएम और शैक्षणिक क्षेत्रों को मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी
यह कॉरिडोर लखनऊ के शैक्षणिक हब के लिए गेमचेंजर साबित होगा। वसंत कुंज से आईआईएम रोड तक मेट्रो पहुंचने से आईआईएम लखनऊ और आसपास के अन्य तकनीकी व उच्च शिक्षण संस्थानों तक पहुंचना बहुत आसान हो जाएगा। वर्तमान में यहां के छात्र, शिक्षक और शोधार्थी निजी वाहनों, ऑटो-रिक्शा या बसों पर निर्भर हैं, जिससे यातायात का भारी दबाव रहता है। मेट्रो सेवा शुरू होने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि प्रदूषण में भी कमी आएगी और रोजाना आने-जाने का खर्च भी घटेगा।
चारबाग-वसंत कुंज कॉरिडोर पहले, फिर आईआईएम विस्तार
मेट्रो विस्तार की प्राथमिकता अभी चारबाग से वसंत कुंज तक के खंड को दी गई है। इस कॉरिडोर का निर्माण कार्य जल्द ही धरातल पर दिखने लगेगा। जैसे ही यह चरण अपने लक्ष्य के करीब पहुंचेगा, वसंत कुंज से आईआईएम रोड तक के विस्तार का काम तेजी से शुरू हो जाएगा। इससे लखनऊ मेट्रो का जाल शहर के कोने-कोने तक फैल जाएगा और शहरवासियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
राष्ट्र प्रेरणा स्थल कॉरिडोर फिलहाल ठंडे बस्ते में
दूसरी ओर, यूपीएमआरसी ने राष्ट्र प्रेरणा स्थल तक मेट्रो विस्तार के प्रस्ताव को फिलहाल लंबित रखने का फैसला लिया है। इसके पीछे तकनीकी और प्रशासनिक कारण हैं। कॉरपोरेशन का कहना है कि नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर को केंद्र और राज्य सरकार से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। अगर अब इसमें नया हिस्सा जोड़ा जाता है, तो पूरी परियोजना की डीपीआर में संशोधन करना पड़ेगा, जिसके लिए केंद्र से दोबारा मंजूरी लेनी होगी। इस प्रक्रिया में लंबा समय लग सकता है। साथ ही, राष्ट्र प्रेरणा स्थल तक विस्तार से करीब 757 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। इसलिए इस प्रस्ताव को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
लखनऊ मेट्रो के लिए नया अध्याय
यह सर्वे और प्रस्तावित कॉरिडोर लखनऊ मेट्रो के विस्तार में एक नया अध्याय जोड़ेगा। शहर के उत्तरी हिस्से और शैक्षणिक संस्थानों को मेट्रो से जोड़ने से न केवल छात्रों और शिक्षकों को फायदा होगा, बल्कि रोजगार, व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। लखनऊ अब तेजी से मेट्रो नेटवर्क के साथ एक आधुनिक और कनेक्टेड शहर बनने की ओर बढ़ रहा है।
सर्वे पूरा होने के बाद डीपीआर तैयार होगी और फिर निर्माण कार्य की रफ्तार पकड़ेगी। शहरवासियों के लिए यह बहुत बड़ी सौगात है, जो जल्द ही हकीकत में बदलने वाली है।

