बरेली: शहर के बीचों-बीच मिलेगा घने जंगलों का अहसास, ‘नगर वन’ प्रोजेक्ट से बदलेगी नाथ नगरी की तस्वीर

Bareilly News: वन विभाग ने बरेली के सीबीगंज आरबोरेटम (30 हेक्टेयर) को 'नगर वन' के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। 10 करोड़ की DPR शासन को भेजी गई है। ट्री-हाउस, योग-ध्यान केंद्र, औषधीय वाटिका, पैदल मार्ग और ईको-टूरिज्म सुविधाएं आएंगी। बीडीए ने 4 करोड़ आरक्षित किए। मयूर वन चेतना केंद्र बंद होने के बाद यह नया विकल्प बनेगा। शहर को घने जंगलों जैसा अहसास मिलेगा और पर्यटन बढ़ेगा।

Samvadika Desk
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इमेज - जागरण
Highlights
  • बरेली अब 'नगर वन' से जंगलों जैसा अहसास देगी!
  • सीबीगंज आरबोरेटम बनेगा हाईटेक ईको-टूरिज्म हब!
  • नाथ नगरी अब सोलर, सेफ और ग्रीन सिटी बनेगी!

बरेली, उत्तर प्रदेश: बरेली अब सिर्फ शोर-शराबे और भीड़भाड़ वाला शहर नहीं रहेगा। जल्द ही शहर के बीचों-बीच एक ऐसा इलाका तैयार होने जा रहा है, जहां घने जंगलों, औषधीय पौधों, ट्री-हाउस और योग-ध्यान केंद्रों का अहसास होगा। वन विभाग ने सीबीगंज स्थित अपने आरबोरेटम को ‘नगर वन’ के रूप में विकसित करने का बड़ा प्लान तैयार किया है। इस परियोजना के लिए 10 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) शासन को भेजी जा चुकी है। बीडीए ने इस मद में 4 करोड़ रुपये आरक्षित कर लिए हैं, जबकि पर्यटन विभाग भी ईको-टूरिज्म के तहत अपनी अलग डीपीआर तैयार कर रहा है।

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सीबीगंज आरबोरेटम बनेगा ‘नगर वन’

सीबीगंज आरबोरेटम करीब 30 हेक्टेयर (लगभग 75 एकड़) में फैला हुआ है। इसमें चंदन, रुद्राक्ष, केवड़ा, शाल और श्रीलंका में पाई जाने वाली दुर्लभ प्रजातियों के पेड़-पौधे पहले से मौजूद हैं। बांस की कई किस्में भी यहां संरक्षित हैं। जिले के कुल 4,120 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में से वन क्षेत्र सिर्फ 225.970 हेक्टेयर है, इसलिए यह आरबोरेटम शहर के लिए एक बड़ा प्राकृतिक खजाना है।

वन विभाग, बीडीए, नगर निगम और पर्यटन विभाग के संयुक्त प्रयासों से इसे ईको-टूरिज्म के रूप में विकसित किया जाएगा। वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार की पहल पर यह परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्य विशेषताएं इस प्रकार होंगी:

  • ट्री-हाउस: जगह-जगह ट्री-हाउस बनाए जाएंगे, जहां पर्यटक और परिवार समय गुजार सकेंगे।
  • औषधीय और हर्बल वाटिका: औषधीय पौधों की विशेष वाटिकाएं विकसित की जाएंगी।
  • योग और ध्यान केंद्र: योग, ध्यान और प्रकृति से जुड़ाव के लिए अलग से केंद्र बनेंगे।
  • टहलने के लिए मार्ग: घूमने-फिरने के लिए सुंदर और सुरक्षित पैदल मार्ग तैयार किए जाएंगे।
  • कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा: मौजूदा पेड़ों को संरक्षित रखा जाएगा और नए औषधीय पौधे लगाकर क्षेत्र को और समृद्ध बनाया जाएगा।

बजट और प्रगति

वन विभाग ने 10 करोड़ रुपये की डीपीआर शासन को भेज दी है। बीडीए ने इस परियोजना के लिए 4 करोड़ रुपये आरक्षित कर लिए हैं। पर्यटन विभाग ईको-टूरिज्म के तहत अपनी अलग डीपीआर तैयार कर रहा है। प्रभागीय वनाधिकारी दीक्षा भंडारी ने बताया कि कई दौर की बैठकों के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। शासन से स्वीकृति मिलते ही निर्माण और विकास कार्य शुरू हो जाएंगे।

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मयूर वन चेतना केंद्र बंद, अब सीबीगंज बनेगा विकल्प

एयरपोर्ट विस्तार की वजह से मयूर वन चेतना केंद्र बंद कर दिया गया है। आसपास कोई वैकल्पिक जगह नहीं बन पा रही है। ऐसे में सीबीगंज में विकसित होने वाला नगर वन इसकी भरपाई करने का सबसे बड़ा विकल्प माना जा रहा है। वन मंत्री की पैरवी से यह परियोजना जल्द स्वीकृत होने की उम्मीद है।

शहरवासियों के लिए बड़ा फायदा

यह परियोजना शहर के लोगों को शोर-शराबे से दूर प्रकृति के करीब लाएगी। पर्यटक और स्थानीय लोग ट्री-हाउस में समय बिता सकेंगे, योग-ध्यान कर सकेंगे और औषधीय पौधों के बीच टहल सकेंगे। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, पर्यावरण संरक्षण होगा और शहर की हरियाली बढ़ेगी।

‘नगर वन’ प्रोजेक्ट बरेली को नई पहचान देने वाला है। आने वाले समय में नाथ नगरी सोलर, सेफ और ग्रीन सिटी के रूप में चमकेगी। सरकार की यह पहल ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पर्यावरण और पर्यटन को नई गति देगी। शासन से स्वीकृति मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।

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