लाहौर, पाकिस्तान: पाकिस्तान की एक अदालत ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बेटी राबिया इमरान और उनके पति इमरान अली यूसुफ के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में जारी गिरफ्तारी वारंट को निलंबित कर दिया है। दोनों पर ‘पंजाब साफ पानी कंपनी’ से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। अदालत ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को निष्पक्ष और न्यायसंगत सुनवाई का अधिकार है। इस फैसले ने पाकिस्तान में राजनीतिक परिवारों पर भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर फिर से बहस छेड़ दी है।
2022 में जारी हुआ था वारंट
यह मामला 2022 का है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान के कार्यकाल में राबिया और उनके पति के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे। दोनों उस समय ब्रिटेन चले गए थे, जिसके बाद अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया था। अब दोनों ने अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने की इच्छा जताई और कहा कि विदेश में होने के कारण वारंट तामील नहीं हो पा रहा था।
अदालत ने लगाई गिरफ्तारी पर रोक
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत के अधिकारी ने बताया कि न्यायाधीश राणा आरिफ ने दोनों के वकील के माध्यम से दिए गए अनुरोध को स्वीकार कर लिया। राबिया और इमरान ने कहा कि वे मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन ‘रेड वारंट’ के कारण उन्हें हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया जा सकता है। अदालत ने गिरफ्तारी वारंट निलंबित कर दिया और दोनों को 5 मई 2026 को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया।
NAB ने नहीं जताई आपत्ति
राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (NAB) ने अदालत को बताया कि अगर गिरफ्तारी वारंट निलंबित कर दिए जाते हैं, तो उसे कोई आपत्ति नहीं है। शहबाज शरीफ का नाम भी इस मामले में आया था, लेकिन सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया गया था।
राजनीतिक परिवारों पर सवाल
यह फैसला पाकिस्तान में राजनीतिक परिवारों और भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर फिर से चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दल और कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने इसे “परिवारवाद” और “विशेष छूट” का उदाहरण बताया है। वहीं शहबाज शरीफ सरकार के समर्थक इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं।
पाकिस्तान में सियासी हलचल
इस घटना ने पाकिस्तान की राजनीति में फिर से हलचल मचा दी है। इमरान खान समर्थक इसे “न्याय की हत्या” बता रहे हैं, जबकि शहबाज शरीफ की पार्टी PML-N इसे कानूनी राहत का मामला बता रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फैसले से आम जनता में सरकार और न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास बढ़ सकता है।
आगे क्या होगा?
अब 5 मई 2026 को दोनों को अदालत में पेश होना है। NAB की जांच अभी भी जारी है और आगे की सुनवाई में सबूतों के आधार पर फैसला लिया जाएगा। यह मामला पाकिस्तान में भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठा रहा है।

