नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत न मिलने के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए गए। इस घटना ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “जेएनयू में पैदा हुई शरजील इमाम की औलादों के इरादों को कुचल दिया जाएगा। ऐसे इरादों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
जेएनयू में क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके विरोध में जेएनयू कैंपस में प्रदर्शन हुआ। भाजपा नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने मोदी और शाह के खिलाफ भड़काऊ और राष्ट्रविरोधी नारे लगाए। इसकी वीडियो क्लिप्स सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं।
जेएनयू प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। विश्वविद्यालय ने सोशल मीडिया पर सिलसिलेवार पोस्ट जारी कर स्पष्ट किया कि “विश्वविद्यालय नवाचार और नए विचारों का केंद्र है, नफरत की प्रयोगशाला नहीं बनने दिया जाएगा।” जेएनयू ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मौलिक अधिकार है, लेकिन हिंसा, गैरकानूनी आचरण या राष्ट्रविरोधी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। घटना की प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और शामिल छात्रों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी – जिसमें निलंबन, निष्कासन और कैंपस से स्थायी प्रतिबंध तक शामिल है। आंतरिक जांच के भी आदेश दे दिए गए हैं।
फडणवीस का तीखा हमला, विपक्ष पर भी निशाना
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र CM देवेंद्र फडणवीस ने जेएनयू की घटना पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “जेएनयू में शरजील इमाम जैसे लोगों की औलादें पैदा हो रही हैं, उनके इरादों को कुचल देंगे।” फडणवीस ने इसे “शहरी नक्सलवाद” करार दिया और विपक्ष पर भी हमला बोला कि ऐसे तत्वों को समर्थन मिल रहा है।
केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने भी घटना की निंदा की। उनका कहना है कि ऐसे नारे “राष्ट्रविरोधी मानसिकता” को दर्शाते हैं और इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
2020 दिल्ली दंगों का बैकग्राउंड
यह विवाद 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ा है। सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़की, जिसमें 53 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। उमर खालिद और शरजील इमाम पर दंगों की साजिश रचने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत खारिज कर दी, जिसके बाद जेएनयू में विरोध प्रदर्शन हुआ।
जेएनयू प्रशासन की सख्ती और राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाओं से मामला गरमा गया है। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि कैंपस में किसी तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद शामिल छात्रों पर बड़ी कार्रवाई होने की संभावना है। यह घटना एक बार फिर जेएनयू की राजनीति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं पर बहस छेड़ रही है।

