कोलकाता: पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सख्त रुख अपनाया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में पकड़े गए घुसपैठियों को अदालतों में नहीं ले जाएँ, बल्कि सीधे सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंप दिया जाए। यह नया नियम एक दिन पहले लागू किया गया है, जिससे घुसपैठियों को तुरंत निर्वासित किया जा सकेगा। शुभेंदु ने कहा कि इस व्यवस्था से राज्य में अवैध घुसपैठ पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा।
पुलिस और आरपीएफ को दिए निर्देश
शुभेंदु ने हावड़ा जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में प्रशासनिक समीक्षा बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि पुलिस आयुक्त और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “कल से नया नियम लागू हो गया है, जिसके तहत घुसपैठियों को अदालतों में नहीं भेजा जाएगा, बल्कि बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ को सौंप दिया जाएगा।”
‘पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो’ ढांचा
मुख्यमंत्री ने इसे व्यापक ‘पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो’ ढांचे का हिस्सा बताया। उन्होंने उस अधिनियम का नाम नहीं बताया, लेकिन ऐसा लगता है कि वे पिछले वर्ष अप्रैल में संसद द्वारा पारित आव्रजन और विदेशी अधिनियम, 2025 का जिक्र कर रहे थे। इस कानून का उद्देश्य भारत में आव्रजन, पंजीकरण, निगरानी, हिरासत और निर्वासन के लिए आधुनिक, तकनीक-आधारित प्रणाली प्रदान करना है।
घुसपैठियों को सीमा पर सौंपने की प्रक्रिया
शुभेंदु ने कहा कि यदि हावड़ा थाने में कोई बांग्लादेशी घुसपैठिया, जो संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने का हकदार नहीं है, हिरासत में लिया जाता है, तो उसे अदालत में नहीं भेजा जाना चाहिए। संबंधित व्यक्ति को उचित भोजन कराया जाना चाहिए और फिर सीधे बोंगांव के पेट्रापोल सीमा या उत्तर 24 परगना जिले के बसीरहाट स्थित सीमा चौकी पर बीएसएफ कर्मियों के पास ले जाया जाना चाहिए।
साप्ताहिक रिपोर्ट सीएमओ को
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ऐसे बंदियों की संख्या पर साप्ताहिक रिपोर्ट डीजीपी के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) को प्रस्तुत करनी होगी। बैठक के दौरान उन्होंने हावड़ा शहर से संबंधित नागरिक अवसंरचना और विकास संबंधी मुद्दों की समीक्षा की।
हावड़ा और बाली में परिसीमन कार्य
शुभेंदु ने कहा कि उन्हें इस वर्ष दिसंबर तक हावड़ा और उससे सटे बाली नगर निकायों के वार्ड के परिसीमन का काम पूरा होने की उम्मीद है। इन दोनों शहरी निकायों में लंबे समय से नगर निकाय चुनाव लंबित हैं। उन्होंने कहा कि हावड़ा नगर क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास की योजना के तहत इस वर्ष के अंत तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने और उसके बाद शहर की जिम्मेदारी निर्वाचित नगर निकाय बोर्ड को सौंपने का फैसला किया है।
अल्पकालिक योजना पर फोकस
अगले तीन महीनों की अल्पकालिक योजना के तहत प्रशासन स्वच्छ एवं शुद्ध पेयजल आपूर्ति, कचरा सफाई, जल निकासी व्यवस्था की मरम्मत तथा पार्क, स्वास्थ्य सुविधाओं और शैक्षणिक संस्थानों जैसी नागरिक सुविधाओं के उन्नयन पर ध्यान देगा। उन्होंने बताया कि नागरिक अवसंरचना में सुधार के लिए योजना बनाने और उसे लागू करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समन्वय समिति गठित की गई है, जिसमें रेलवे और नगर निकाय के अधिकारी सदस्य होंगे।
अवैध निर्माणों पर रिपोर्ट माँगी
शुभेंदु ने कहा कि उन्होंने हावड़ा में अवैध निर्माणों पर तथ्यात्मक रिपोर्ट माँगी है और बिल्डरों के एक वर्ग द्वारा कथित भ्रष्टाचार की जाँच शुरू की जाएगी। जिन जलाशयों को पाट दिया गया है, उनके स्थान पर प्रशासन वैकल्पिक जल निकाय विकसित करेगा।
भ्रष्टाचार आयोग का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने संस्थागत भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा गठित आयोग का भी उल्लेख किया, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति बिस्वजीत बसु कर रहे हैं। आयोग के सदस्य सचिव वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के जयरामन हैं। इस पैनल को ‘कट मनी’ घोटाले समेत भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच का जिम्मा सौंपा गया है और यह एक जून से आधिकारिक रूप से काम शुरू करेगा।
तेजी से कार्रवाई का आश्वासन
उन्होंने कहा कि आयोग तेजी से कार्रवाई करेगा। यह साक्ष्य जुटाएगा और जनसुनवाई करेगा, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज होगी, गिरफ्तारियाँ की जाएंगी और आगे दंडात्मक कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि गबन की गई राशि दोषियों से वसूल की जाएगी।
राजनीतिक हिंसा और कानून व्यवस्था पर फोकस
शुभेंदु ने कहा कि उन्होंने हावड़ा शहर पुलिस को राजनीतिक हिंसा, कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों और खासकर महिलाओं के खिलाफ अपराधों में नई प्राथमिकी दर्ज कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

