भरतपुर: मजदूरी कर पति ने पत्नी को बनाया सरकारी टीचर, ससुर ने बेची फसल, नौकरी लगते ही छोड़ा साथ

Bharatpur News: भरतपुर के अनूप कुमार ने मजदूरी और उनके पिता ने फसल बेचकर पत्नी पंकज को सरकारी टीचर बनाया। लेकिन 2023 में नौकरी मिलते ही पंकज ने अनूप और परिवार का साथ छोड़ दिया, कहकर कि वह बेरोजगार है। अनूप ने जिला कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई। प्रशासन ने जाँच शुरू की है।

Samvadika Desk
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Highlights
  • भरतपुर में पत्नी ने सरकारी टीचर बनते ही छोड़ा पति का साथ!
  • अनूप ने मजदूरी कर पंकज को पढ़ाया, ससुर ने बेची फसल!
  • अनूप और पिता ने जिला कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार!

भरतपुर, राजस्थान: राजस्थान के भरतपुर जिले में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहाँ एक पति ने मजदूरी कर और ससुर ने फसल बेचकर पत्नी को पढ़ाया-लिखाया, लेकिन सरकारी टीचर बनते ही पत्नी ने पति का साथ छोड़ दिया। पीड़ित पति अनूप कुमार और उनके परिवार ने जिला कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई है। यह घटना सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जो रिश्तों में विश्वासघात और मेहनत की बेवफाई को उजागर करती है।

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शादी और सपनों की शुरुआत

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भुसावर तहसील के सलेमपुर खुर्द गाँव के अनूप कुमार की शादी 14 नवंबर 2021 को पास के नगला हवेली गाँव की पंकज कुमारी से हुई थी। शादी के बाद पंकज ने सरकारी नौकरी पाने का सपना देखा। अनूप ने अपनी पत्नी के इस सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात मजदूरी की। उसने शहर में किराए के कमरे में पंकज को रखा, उसकी कोचिंग का खर्च उठाया, और खाने-पीने से लेकर पढ़ाई तक का सारा बोझ अपने कंधों पर लिया।

परिवार की कुर्बानी

अनूप के पिता मोती लाल ने भी बेटे और बहू के सपनों को पूरा करने के लिए अपनी फसल बेच दी, ताकि पंकज की पढ़ाई का खर्च पूरा हो सके। अनूप ने बताया कि उसने अपनी मेहनत से पंकज को बीएसटीसी 2021 की पढ़ाई कराई। मेहनत रंग लाई, और पंकज ने 2023 की प्रथम लेवल शिक्षक भर्ती परीक्षा पास कर सरकारी स्कूल टीचर की नौकरी हासिल कर ली। लेकिन इस सफलता ने उनके रिश्ते को उलट दिया।

नौकरी के बाद बेवफाई

पंकज को सरकारी नौकरी मिलते ही उसके व्यवहार में बदलाव आ गया। वह सास-ससुर से आए दिन झगड़ा करने लगी। अनूप ने बताया कि मई 2025 में पंकज ने साफ तौर पर उसके साथ रहने से इंकार कर दिया। उसका कहना था कि अब वह एक सरकारी टीचर है, जबकि अनूप बेरोजगार है। इस बेवफाई ने अनूप और उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

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न्याय की गुहार

अनूप और उनके पिता मोती लाल ने जिला कलेक्टर से इस मामले में हस्तक्षेप की माँग की है। अनूप ने कहा, “मैंने दिन-रात मजदूरी कर अपनी पत्नी को पढ़ाया, ताकि हमारा भविष्य बेहतर हो। मेरे पिता ने फसल बेचकर उसकी पढ़ाई का खर्च उठाया। लेकिन अब वह हमें छोड़कर चली गई।” परिवार ने प्रशासन से पंकज को समझाने और रिश्ते को बचाने की अपील की है।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका

जिला प्रशासन ने अनूप की शिकायत पर संज्ञान लिया है, और मामला जाँच के लिए भेजा गया है। पुलिस और स्थानीय अधिकारी इस मामले की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं, ताकि यह समझा जा सके कि पंकज के इस फैसले के पीछे की वजह क्या है। प्रशासन से परिवार को उम्मीद है कि उनकी मेहनत और त्याग को इंसाफ मिलेगा।

सामाजिक और भावनात्मक सवाल

यह घटना रिश्तों में विश्वास, त्याग, और बेवफाई के सवाल उठाती है। अनूप और उसके परिवार की मेहनत ने पंकज को सरकारी नौकरी तक पहुँचाया, लेकिन उसकी बेरुखी ने एक परिवार को तोड़ दिया। यह समाज से पारिवारिक रिश्तों में संवेदनशीलता, आपसी समझ, और आर्थिक असमानता को दूर करने की माँग करता है। साथ ही, यह प्रशासन से त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की जरूरत को रेखांकित करता है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिले।

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