असम: बहुविवाह, लिव-इन रिलेशन, मुस्लिम मैरिज एक्ट – जानिए असम UCC बिल 2026 की पूरी डिटेल

Uniform Civil Code Assam Bill 2026: असम सरकार ने Uniform Civil Code (UCC) बिल 2026 पेश कर बहुविवाह पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। लिव-इन रिलेशन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है और मुस्लिम मैरिज एक्ट को रद्द कर दिया गया है। शादी की न्यूनतम उम्र, उत्तराधिकार में समानता और तलाक के नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं। अनुसूचित जनजातियों को इस बिल से छूट दी गई है।

Samvadika Desk
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हिमंत बिस्वा सरमा (इमेज - सोशल मीडिया)
Highlights
  • असम में UCC बिल 2026 पेश, बहुविवाह पर पूरी तरह रोक!
  • लिव-इन रिलेशन अब एक महीने में कराना होगा रजिस्टर!
  • UCC बिल में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर जोर!

गुवाहाटी, असम: असम सरकार ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) को लेकर बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व वाली सरकार ने विधानसभा में ‘असम यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल 2026’ पेश कर दिया है। इस बिल में पूरे राज्य में शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप को एक समान कानूनी ढांचे में लाने का प्रावधान किया गया है।

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बिल के प्रमुख प्रावधान

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस विधेयक के तहत असम में बहुविवाह (पॉलीगैमी) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब एक व्यक्ति केवल एक ही शादी कर सकेगा। शादी की न्यूनतम उम्र पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय की गई है। अनुसूचित जनजातियों को इस बिल के दायरे से बाहर रखा गया है ताकि उनके पारंपरिक अधिकारों की रक्षा हो सके।

शादी का रजिस्ट्रेशन 60 दिनों में जरूरी

बिल में सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखते हुए विभिन्न प्रकार की शादियों को मान्यता दी गई है। इसमें हिंदू, मुस्लिम, अहोम, ईसाई समेत सभी समुदायों की पारंपरिक रस्में शामिल हैं। लेकिन हर शादी का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। जोड़े को शादी के 60 दिनों के अंदर सब-रजिस्ट्रार के सामने विवाह प्रमाण-पत्र जमा करना होगा।

तलाक और बच्चों की कस्टडी

तलाक के लिए क्रूरता, परित्याग और आपसी सहमति जैसे आधार तय किए गए हैं। खास बात यह है कि तलाक के मामलों में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की कस्टडी सामान्य रूप से मां को ही दी जाएगी।

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उत्तराधिकार में लैंगिक समानता

उत्तराधिकार के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। बिना वसीयत के संपत्ति बंटवारे में पति, पत्नी, बच्चे और माता-पिता को समान अधिकार दिया जाएगा। हर वयस्क व्यक्ति को लिखित वसीयत बनाने का अधिकार होगा, जिसे गवाहों के सामने प्रमाणित करना जरूरी होगा।

लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्त नियम

लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता देते हुए इसे एक महीने के अंदर रजिस्टर कराना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे रिलेशन से जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा। यदि कोई साथी रिश्ता छोड़कर चला जाता है तो दूसरे साथी को अदालत के जरिए आर्थिक सहायता (मेंटेनेंस) का अधिकार होगा।

बहुविवाह पर सजा का प्रावधान

नए बिल में नियम तोड़ने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। बहुविवाह करने पर 7 साल तक की कैद हो सकती है। जबरन, धोखे या छिपाकर शादी करने पर भी 7 साल की सजा और जुर्माना लग सकता है। शादी, तलाक या लिव-इन का रजिस्ट्रेशन न कराने पर जुर्माना और जाली दस्तावेज पेश करने पर सजा का प्रावधान रखा गया है।

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मुस्लिम मैरिज एक्ट हुआ रद्द

बिल के जरिए ‘असम मुस्लिम मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट 2024’ को भी निरस्त कर दिया गया है। हालांकि, UCC लागू होने से पहले हुए बहुविवाह को सुरक्षा प्रावधान (Saving Clause) के तहत वैध माना जाएगा।

सरकार का बयान

संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने सदन में बिल पेश करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने वादा किया था कि अगर सरकार दोबारा बनी तो पहले सत्र में UCC बिल पेश किया जाएगा। आज हमने ठीक वैसा ही किया है।”

यह बिल असम में लैंगिक समानता, महिलाओं के अधिकार और कानूनी एकरूपता लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। विपक्षी दलों की ओर से इस पर बहस होने की उम्मीद है।

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