लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक प्रेम कहानी ने ऐसा मोड़ लिया कि यह अब चर्चा का विषय बन गई है। एक प्रेमी जोड़े की शादी की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं – कार्ड छप गए, तिलक की तारीख तय हो गई, मेहमानों को न्योता बंट गया। लेकिन तिलक के दिन दुल्हन के परिवार ने फोन पर ऐलान कर दिया, “यह शादी नहीं होगी। कार्ड तो तुम्हें बेवकूफ बनाने के लिए छपवाए थे।” इसके बाद प्रेम विवाह करने पर दुल्हन को बंदूक की नोक पर उठा ले जाया गया। तीन महीने की लंबी कानूनी जंग के बाद कोर्ट के आदेश पर अब जाकर FIR दर्ज हुई है। यह है लखनऊ के ऋषिकेश पांडे और बाराबंकी की मुस्कान तिवारी की दिल दहलाने वाली कहानी।
प्रेम से शादी तक: परिवार की सहमति, फिर धोखा
आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, ऋषिकेश पांडे और मुस्कान तिवारी की प्रेम कहानी लंबे समय से चली आ रही थी। दोनों ने परिवारों की सहमति से शादी का फैसला लिया था। पिछले साल 25 नवंबर 2024 को तिलक और 9 दिसंबर को शादी की तारीख तय हुई। शादी की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गईं। रिश्तेदारों को न्योता बांटा गया, कार्ड छपे, और घर में उत्साह का माहौल था। लेकिन तिलक की रस्म वाले दिन मुस्कान के जीजा सूरज तिवारी ने फोन करके सारा उत्साह ठंडा कर दिया। उन्होंने कहा, “यह शादी नहीं होगी। हमने तो तुम्हारी बेइज्जती करने के लिए कार्ड छपवाए थे।” यह सुनकर ऋषिकेश और उनके परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।
बंद कमरे में पिटाई: मुस्कान पर परिवार का जुल्म
अगले दिन ऋषिकेश मुस्कान से मिलने बाराबंकी स्थित उसके घर पहुंचा। वहां का मंजर देखकर वह सन्न रह गया। मुस्कान को उसके पिता अशोक तिवारी, मां सरिता और जीजा सूरज ने कमरे में बंद कर रखा था और उसकी पिटाई कर रहे थे। ऋषिकेश ने रिश्ते को लेकर समझाने की कोशिश की, लेकिन परिवार ने साफ मना कर दिया। हालात तब और बिगड़ गए, जब 29 दिसंबर को मुस्कान किसी तरह घर से भागकर ऋषिकेश के पास पहुंची। उसने बताया कि उसे कई दिनों से कैद करके मारा-पीटा जा रहा था, और उसकी जान को खतरा है।
मंदिर में शादी, फिर बंदूक की नोक पर अपहरण
मुस्कान की हालत और परिवार के रवैये को देखते हुए, दोनों ने तुरंत फैसला लिया। 30 दिसंबर को ऋषिकेश और मुस्कान ने लखनऊ के आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों से शादी कर ली। उसी दिन उन्होंने कोर्ट में विवाह का रजिस्ट्रेशन भी कराया। लेकिन उनकी खुशी ज्यादा देर नहीं टिकी। उसी शाम, जब ऋषिकेश कुछ सामान लेने बाहर गया, मुस्कान के पिता, जीजा और 10-12 लोग हथियारों के साथ पहुंचे। उन्होंने बंदूक की नोक पर मुस्कान को जबरन उठा लिया और ले गए। इसके बाद से मुस्कान का कोई पता नहीं चला।
ऋषिकेश ने उसी रात चिनहट थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने जांच का हवाला देकर मामला टाल दिया। तीन महीने तक ऋषिकेश ने पुलिस अधिकारियों से लेकर पुलिस आयुक्त तक गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार, हार न मानने वाले ऋषिकेश ने कोर्ट का रुख किया।
कोर्ट के आदेश पर FIR: अब पुलिस की जांच शुरू
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट के हस्तक्षेप से चिनहट थाने में मुस्कान के पिता, जीजा और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया गया। चिनहट थाने के इंस्पेक्टर ने बताया कि मामले की गहन जांच शुरू हो गई है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर अपहरणकर्ताओं की तलाश कर रही है। साथ ही, मुस्कान की बरामदगी के लिए छापेमारी की जा रही है।
सामाजिक सवाल: प्रेम और परिवार का टकराव
यह मामला न केवल एक प्रेमी जोड़े की दुखद कहानी है, बल्कि समाज में प्रेम विवाह और परिवार की सहमति के बीच टकराव को भी उजागर करता है। मुस्कान और ऋषिकेश की कहानी उन कई जोड़ों की तरह है, जो प्यार के लिए हर बाधा पार करने को तैयार हैं, लेकिन परिवार और समाज की बंदिशें उनकी राह में रोड़ा बनती हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस घटना पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग ऋषिकेश के हौसले की तारीफ कर रहे हैं, तो कुछ इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या मुस्कान का परिवार शुरू से ही धोखा देने की साजिश रच रहा था।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि इस तरह के मामलों में हिंसा या गैरकानूनी कदम न उठाएं। फिलहाल, मुस्कान की तलाश और इस साजिश के पीछे की सच्चाई सामने लाने की जिम्मेदारी पुलिस पर है। यह प्रेम कहानी अभी अधूरी है, लेकिन ऋषिकेश की जिद और कोर्ट का साथ इस कहानी को नया मोड़ दे सकता है।

