यूपी: छांगुर बाबा की कट्टर मौलानाओं से साठगाँठ, हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ किताबें तैयार!

Changur Baba Update: बलरामपुर में छांगुर बाबा के धर्मांतरण रैकेट ने हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ किताबें तैयार कीं और कट्टर मौलानाओं से साठगाँठ की। ATS ने उसके ISI और नेपाल कनेक्शन का खुलासा किया। कोठी में 200 लोगों को प्रशिक्षण की साजिश थी।

Samvadika Desk
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छांगुर बाबा
Highlights
  • छांगुर बाबा ने कट्टर मौलानाओं संग रची धर्मांतरण की साजिश!
  • हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ बनाई नफरत फैलाने वाली किताबें!
  • ATS ने खोला रहस्यमय आका और विदेशी फंडिंग का राज!

बलरामपुर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में अवैध धर्मांतरण रैकेट के सरगना जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा के काले कारनामों की परतें खुल रही हैं। यूपी ATS की जाँच में सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि छांगुर कट्टर मौलानाओं से संपर्क में था और हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ नफरत फैलाने वाली किताबें तैयार कर रहा था। उसने बलरामपुर में दो आलीशान कोठियाँ बनवाईं, जिनमें तहखाने जैसे कक्ष थे, जहाँ 200 लोगों को धर्मांतरण का प्रशिक्षण देने की साजिश थी। यह मामला 15 जुलाई 2025 तक और गंभीर हो गया है।

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कट्टर मौलानाओं से गठजोड़

ATS की जाँच से पता चला कि छांगुर ने प्रदेश के कुख्यात मौलानाओं से संपर्क साधा था। वह अपने गुर्गों को धर्मांतरण की तकनीक में माहिर बनाने की योजना बना रहा था। इसके लिए उसने 20 कक्षों में नियमित तकरीर (धार्मिक प्रवचन) की व्यवस्था की थी। उसका मकसद गरीब हिंदू परिवारों और श्रमिकों को पैसे का लालच देकर इस्लाम में परिवर्तित करना था। ‘शिजर-ए-तय्यबा’ नामक किताब भी इसी उद्देश्य से बनाई गई, जो इस्लाम को बढ़ावा देने और हिंदू देवी-देवताओं के प्रति नफरत पैदा करने के लिए थी।

कोठी में साजिश का अड्डा

छांगुर ने 2022 में मधपुर में दो कोठियों का निर्माण शुरू करवाया, जो अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुई थीं। इनमें तहखाने जैसे कक्ष बनाए गए थे, जहाँ धर्मांतरण का प्रशिक्षण होना था। ठेकेदार वसीउद्दीन ने एक मीडिया चैनल को बताया कि कोठी के पिलर ऐसे बनाए गए थे कि कमरों को बाद में बाँटा जा सके। उसे शक था कि कोठी का इस्तेमाल गलत कार्यों के लिए हो रहा है, लेकिन छांगुर ने झूठ बोला कि वह स्कूल या अस्पताल खोलेगा। 8 और 9 जुलाई 2025 को इनमें से एक कोठी पर बुलडोजर चला, लेकिन कुछ हिस्सा अभी बाकी है।

रहस्यमय आका का राज

जाँच में सामने आया कि छांगुर के पीछे एक बड़ा मास्टरमाइंड था, जिसके फोन पर वह तुरंत प्लान बदल देता था। वह कभी स्मार्टफोन नहीं इस्तेमाल करता था, बल्कि पुराने कीपैड फोन का उपयोग करता था। उसे अपने आका का नंबर जुबानी याद था। फोन आने पर वह सिर्फ “हुक्म… तामील” बोलता और चेहरे की रंगत बदल जाती थी। एक महीने में 36 बार उसने कोठी के निर्माण में बदलाव करवाए, जिससे लागत बढ़ी और ठेकेदार से विवाद हुआ।

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विदेशी फंडिंग का कनेक्शन

छांगुर का रैकेट विदेशी फंडिंग से चलता था। ATS को सऊदी अरब के इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक, मुस्लिम वर्ल्ड लीग, दावते इस्लाम, और इस्लामिक संघ ऑफ नेपाल से उसके तार मिले। उसकी करीबी नीतू उर्फ नसरीन के खातों में 5 करोड़ और नवीन उर्फ जमालुद्दीन के खातों में 34 करोड़ रुपये विदेश से आए। यह पैसा धर्मांतरण और संपत्ति खरीद में लगा।

नेपाल और ISI से संबंध

पिछली जाँच में पता चला था कि छांगुर ने नेपाल में पाकिस्तानी दूतावास के जरिए ISI से संपर्क की कोशिश की थी। वह नेपाल के दांग जिले के एक धार्मिक नेता के साथ काठमांडू गया था। उसका मकसद बलरामपुर को इस्लामिक स्टेट बनाना था। ATS अब इस कनेक्शन की गहराई से जाँच कर रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा

यह मामला धर्मांतरण से आगे बढ़कर राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल बन गया है। छांगुर की साजिश ने सामाजिक सौहार्द और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई। यह समाज से जागरूकता और सरकार से सख्त कार्रवाई की माँग करता है, ताकि ऐसी राष्ट्रविरोधी गतिविधियाँ रुकें।

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